अन्तर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान

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संस्थान

अन्तर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आइ आइ पी. एस), एस्केप क्षेत्र के लिए जनसंख्या अध्ययन में प्रशिक्षण तथा शोध के लिए क्षेत्रीय संस्थान के रूप में कार्य करता है । इसकी स्थापना मुंबई में जुलाई, 1956 में हुई थी और जुलाई 1970 तक इसे जनांकिकीय प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र (डी टी आर सी) और वर्ष 1985 तक इसे अन्तर्राष्ट्रीय जनसंख्या अध्ययन संस्थान (आइ आइ पी एस) के रूप में जाना जाता था । इसकी शैक्षणिक गतिविधियों के विस्तार को आगे बढ़ाने के लिए वर्ष 1985 में संस्थान का इसके वर्तमान नाम के रूप में पुनर्नामकरण किया गया और मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा इसे 19 अगस्त, 1985 को यू जी सी अधिनियम 1956 की धारा 3 के अंतर्गत ‘विश्वविद्यालय समतुल्य ’ घोषित किया गया । इस मान्यता ने संस्थान को स्वयं मान्यताप्राप्त उपाधि प्रदान करने में मदद की और साथ ही इसने शैक्षणिक संस्था के रूप में संस्थान के भावी विस्तार के लिए मार्ग प्रशस्त किया ।

यह संस्थान वर्ष 1956 में सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट, भारत सरकार तथा संयुक्त राष्ट्र की संयुक्त प्रायोजकता में प्रारंभ हुआ और इसने एशिया और प्रशांत क्षेत्र के विकासशील देशों के लिए जनसंख्या अध्ययन में प्रशिक्षण तथा शोध के लिए स्वयं को प्रमुख संस्थान के रूप में स्थापित किया । आइ आइ पी एस सभी क्षेत्रीय केन्द्रों के बीच अद्वितीय स्थान रखता है और उनमें यह ऐसा पहला केन्द्र प्रारंभ किया गया है जो किसी भी अन्य क्षेत्रीय केन्द्रों द्वारा किए जाने वाले कार्यों की अपेक्षा अधिक व्यापक जनसंख्या के लिए कार्य करता है । यह संस्थान, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के प्रशासनिक नियंत्रण में है ।

अध्यापन तथा शोध गतिविधियों के अलावा, संस्थान सरकारी तथा गैर-सरकारी संगठनों और अन्य शैक्षणिक संस्थाओं को परामर्शी सेवाएं भी प्रदान करता है । इन तमाम वर्षों के दौरान संस्थान ने एस्केप क्षेत्र के विभिन्न देशों में जनसंख्या तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यावसायिकों के केन्द्र निर्माण में सहायता की है । पिछले 53 वर्षों के दौरान संस्थान में एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के 42 विभिन्न देशों, अफ्रीका तथा उत्तरी अमेरिका के छात्रों को प्रशिक्षित किया गया है । संस्थान में प्रशिक्षित ज्यादातर छात्र इस समय विभिन्न देशों की सरकारों, विश्वविद्यालयों तथा शोध संस्थानों के साथ ही प्रतिष्ठित राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय संगठनों में जनसंख्या तथा स्वास्थ्य के क्षेत्र में महत्त्वपूर्ण पदों पर हैं ।

संस्थान के उद्देश्य

  1. भारत तथा अन्य देशों के व्यक्तियों को परिवार नियोजन के जनांकिकीय पहलुओं सहित जनांकिकी तथा संबंधित क्षेत्रों में प्रशिक्षित करना ।
  2. भारत तथा एस्केप क्षेत्र के अन्य देशों के लिए विशेष महत्त्व रखने वाली जनसंख्या समस्याओं पर वैज्ञानिक शोध प्रारंभ करना ।
  3. भारत तथा विश्व के अन्य देशों की जनसंख्या के बारे में जनांकिकीय सूचना को एकत्र, सुव्यवस्थित तथा उसका प्रसार करना ।
  4. सरकारी विभागों, सार्वजनिक निगमों अथवा निजी प्रतिष्ठानों को समाज के उद्देश्य के अनुसार यथा वांछनीय जनांकिकीय समस्याओं से संबंधित शोध, मूल्यांकन, प्रशिक्षण, परामर्श तथा मार्गदर्शन संबंधी सेवाएं प्रदान करना ।
  5. अध्ययन पाठ्यक्रमों, सम्मेलनों, व्याख्यानों, संगोष्ठियों को प्रारंभ, आयोजित करना और उन्हें सुगम बनाना तथा उपर्युक्त उद्देश्यों को आगे बढ़ाना ।
  6. समाज के उद्देश्य को आगे बढ़ाने के लिए जर्नलों तथा शोध पत्रों, पुस्तकों को प्रकाशित करना तथा पुस्तकालय और सूचना सेवाओं को स्थापित करना, जारी रखना ।

संस्थान का संकल्प तथा संदर्शन

संकल्प

“ संस्थान उच्च गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अध्यापन और शोध के माध्यम से स्वयं को जनसंख्या, स्वास्थ्य तथा विकास के मामले में एक उत्कृष्ट केन्द्र के रूप में स्थापित करने का प्रयास करेगा । इसे (क) सक्षम व्यावसायिकों के सृजन से (ख) वैज्ञानिक जानकारी तथा प्रमाण के सृजन और उसके प्रसार से (ग) सहयोग तथा ज्ञान के आदान-प्रदान से और (घ) प्रचार-प्रसार तथा जागरूकता के माध्यम से हासिल किया जाएगा ।”

संदर्शन

“ आइ आइ पी एस को जनसंख्या विज्ञान के क्षेत्र में एक प्रमुख शिक्षण एवं शोध संस्थान के रूप में प्रतिष्ठित करना जो समावेशन, बोधशीलता एवं अधिकार संरक्षण जनित मूल्यों के संबल से भावी राष्ट्रीय एवं वैश्विक अपेक्षाओं के अनुकूल हो ।”

लक्ष्य तथा उद्देश्य

       सक्षम व्यावसांयिकों का सृजन

  • वर्ष 2015 तक विभिन्न स्तरों पर स्नातकों की संख्या को बढ़ाकर दुगुना और वर्ष 2020 तक इसे तिगुना करना ।
  • अन्तर्राष्ट्रीय रूप से मान्यताप्राप्त मानकों के अनुसार पाठ्यक्रम की विषयवस्तु, अध्यापन तथा संकाय सदस्यों की संख्या का निर्धारण करना ।
  • उपर्युक्त दोनों लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए बहुविषयक ज्ञान स्रोतों की उपलब्धता तथा कौशल को सुनिश्चित करने के लिए संकाय सदस्यों की संख्या में वृद्धि तथा संकाय की गुणवत्ता में सुधार करना ।

वैज्ञानिक ज्ञान तथा साक्ष्य का सृजन और प्रसार

  • प्रति संकाय प्रतिवर्ष अभिजात समीक्षा वाले जर्नलों में कम से कम दो शोधलेख (एक शोध लेख अधिमानतः अन्तर्राष्ट्रीय जर्नल में ) ।
  • प्रतिवर्ष प्रति विभाग द्वारा राष्ट्रीय तथा अन्तर्राष्ट्रीय महत्त्व की कम से कम एक नई शोध परियोजना पूर्ण की जानी है ।
  • दो वर्ष में एक बार नीति या वर्तमान महत्त्व के मुद्दों पर फोकस करते हुए एक अन्तर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन करना ।
  • प्रत्येक विभाग द्वारा दो वर्ष में एक बार तकनीकी तथा कार्यप्रणाली से संबंधित प्रगति पर एक कार्यशाला का आयोजन करना ।
  • संस्थान के प्रत्येक संकाय सदस्य द्वारा उपर्युक्त अपेक्षाओं के अनुपालन को बढ़ावा देने के लिए संस्थान की कार्यकारी परिषद द्वारा प्रोत्साहन तथा निरूत्साहन योजना विकसित की जानी है ।

सहयोग तथा ज्ञान का आदान-प्रदान

  • शोध तथा अल्पकालिक प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारतीय (सरकारी/निजी क्षेत्र) संस्थाओं/संगठनों के साथ कम से कम दो सहयोग कार्यक्रमों का पता लगाना तथा उन्हें प्रारंभ/स्थापित करना ।
  • प्रत्येक संकाय सदस्य का देश के भीतर/बाहर प्रत्येक पांच वर्ष में कम से कम एक बार आदान-प्रदान/दौरा कार्यक्रमों में भाग लेना । प्रत्येक सत्र के दौरान आइ आइ पी एस में कम से कम एक राष्ट्रीय तथा एक अन्तर्राष्ट्रीय अभ्यागत संकाय की उपस्थिति सुनिश्चित करना ।
  • आवश्यकता के आधार पर सहायक संकाय नियुक्त करने का प्रावधान करना ।
  • दो वर्षीय मास्टर डिग्री वाले छात्रों को सहयोगी संस्थाओं में ग्रीष्मकालीन प्रशिक्षण/अंतःशिक्षुता दिलाना ।
  • स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय से प्राप्त होने वाली निधि पर संस्थान की वित्तीय निर्भरता को वर्ष 2015 तक 80% से और वर्ष 2020 तक 50% के स्तर तक कम करने के लिए उपाय करना ।

समर्थन तथा जागरूकता

  • सतत परिमाणात्मक आधार पर अच्छी तरह से समन्वित समर्थन प्रयासों के माध्यम से राजनीतिक प्रतिनिधियों तथा समाज के अन्य तबके में विकासात्मक उपकरण के रूप में जनांकिकी तथा जनसंख्या विज्ञान के सकारात्मक मूल्य को बढ़ाना ।
  • समर्थन तथा जागरूकता अभियानों के माध्यम से राष्ट्रीय, राज्य तथा स्थानीय सरकारी ढाँचे में संबंधित स्थान के लिए अनिवार्य शैक्षिक योग्यता के रूप में जनांकिकी तथा जनसंख्या विज्ञान के लिए तीन वर्ष के भीतर मान्यता प्राप्त करने का प्रयास करना ।

संस्थान के कार्य

अध्यापन

संस्थान निम्नलिखित नियमित अध्यापन कार्यक्रम प्रस्तावित करता हैः

  • जनसंख्या अध्‍ययन में कला निष्णामत/विज्ञान निष्णामत (एम ए/ एम.एससी.)
  • जैव-सांख्यिकी तथा जनांकिकी विज्ञान में मास्टर (एम. एससी)
  • जनसंख्या अध्‍ययन में मास्टर (एमपीएस)
  • जनसंख्या अध्‍ययन में मास्टर ऑफ फिलॉसॉफी (एम.फिल.)
  • जनसंख्या अध्‍ययन में डॉक्टर ऑफ फिलॉसॉफी (पीएच.डी.)
  • पोस्ट डॉक्टरल फ़ेलोशिप (पी. डी. एफ)
  • जनसंख्या अध्‍ययन में मास्टर (एम पी एस) (दूरस्थश शिक्षण)
  • स्‍वास्‍थ्‍य प्रोत्‍साहन शिक्षा में डिप्‍लोमा (डी.एच.पी.ई.)
  • अल्पकालिक पाठ्यक्रम 

शोध

अध्यापन गतिविधियों के अलावा संस्थान जनसंख्या के विभिन्न पहलुओं पर बृहत् संख्या में शोध परियोजनाएं भी संचालित करता है । संस्थान मूल्यांकन परक अध्ययन तथा बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण भी संचालित करता है । जनसंख्या परिवर्तन के घटकों जैसे प्रजननता, मर्त्यता तथा प्रवसन के विभिन्न सामाजिक तथा आर्थिक चरों के परस्पर संबंध से संबंधित अध्ययन पर महत्त्व दिया गया है ।

संस्थान की शोध परियोजनाएं ज्यादातर स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार और साथ ही राज्य सरकार, विश्व बैंक, संयुक्त राष्ट्र, जनसंख्या निधि, विश्व स्वास्थ्य संगठन, अन्तर्राष्ट्रीय श्रम संगठन तथा अन्य सरकारी और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा निधिक होती हैं ।

परामर्शी सेवाएं

संस्थान जनसंख्या से संबंधित समस्याओं पर सरकार, संयुक्त राष्ट्र तथा विशिष्ट एजेंसियों के अनुरोध पर परामर्शी सेवाएं प्रदान और विशेष अध्ययन संचालित करता है । जनसंख्या, शोध प्रणाली इत्यादि के विभिन्न क्षेत्रों में स्टाफ को विशेषज्ञता प्रदान करने के साथ ही जिन संगठनों को अल्पकालिक परामर्शी सेवाओं की आवश्यकता है उन्हें हमारे उपलब्ध विशेषज्ञों द्वारा ऐसी सेवाएं देने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं ।

प्रलेखीकरण

संस्थान ने जनसंख्या तथा उससे संबंधित विषयों पर हाल ही की पुस्तकों के साथ उत्कृष्ट पुस्तकालय के दर्जे को बनाए रखा है ।

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अन्तर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (आइ आइ पी एस) जिसे पहले जनांकिकीय प्रशिक्षण एवं शोध केन्द्र के रूप में जाना जाता था। इसकी स्थापना जुलाई 1956 में मुंबई में एशिया एवं प्रशांत क्षेत्र के देशों के लिए जनसंख्या अध्ययन में प्रशिक्षण तथा शोध के लिए क्षेत्रीय केन्द्र के रूप में की गई थी।
 
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